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Showing posts from June, 2023

लक्ष्य पर ध्यान करिए

  एक साधु किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया....!!! पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!! तो एक ने कहा- "आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया। पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।" पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली... उसने तुरंत पत्थर फेंक दिया... दूसरी बोली-- "साधु हुआ, लेकिन खीज नहीं गई..। अभी रोष नहीं गया, तकिया फेंक दिया।" तब साधु सोचने लगा, अब वह क्या करें ? तब तीसरी बोली- "बाबा! यह तो पनघट है, यहां तो हमारी जैसी पनिहारिनें आती ही रहेंगी, बोलती ही रहेंगी, उनके कहने पर तुम बार-बार परिवर्तन करोगे तो साधना कब करोगे?" लेकिन चौथी ने बहुत ही सुन्दर और एक बड़ी अद्भुत बात कह दी- "क्षमा करना, लेकिन हमको लगता है, तुमने सब कुछ छोड़ा लेकिन अपना चित्त नहीं छोड़ा है, अभी तक वहीं का वहीं बने हुए है। दुनिया पाखण्डी कहे तो कहे, तुम जैसे भी हो, हरिनाम लेते रहो।" सच तो यही है, दुनिया का तो काम ही है कहना... आंखे बंद करोगे तो कहेंगे कि... "ध्यान का नाटक कर रहा है।" चारो ओर देखोगे तो कहेंगे कि... "नि...

खुद की खुशियों को पहचानना सीखो! जीवन का असल सुख परिजनों को खुश देखने में है!

  "आ गया मेरा लाल! कितना दुबला हो गया है रे! खाली पैसे बचाने के चक्कर में ढंग से खाता-पीता भी नहीं क्या!" "बारह घंटे की ड्यूटी है अम्मा, बैठकर थोड़े खाना है! ये लो, तुम्हारी मनपसंद मिठाई!"--कहकर उसने मिठाई का डिब्बा माँ को थमा दी! "कितने की है?" "साढ़े तीन सौ की!" "इस पैसे का फल नहीं खा सकता था! अब तो अंगूर का सीजन भी आ गया है!"--अम्मा ने उलाहना दिया। पूरा दिन गाँव-घर से मिलने में बीत गया था! रात हुई, एकांत में उसने बैग खोलकर एक पैकेट निकाला और पत्नी की ओर बढ़ा दिया-- "क्या है ये?" "चॉकलेट का डिब्बा, खास तुम्हारे लिए!" "केवल मेरे लिए ही क्यों!" "अरे समझा करो। सबके लिए तो मिठाई लायी ही है!" "कितने का है?" "आठ सौ का!" "हांय!!" "विदेशी ब्रांड है!" "तो क्या हुआ!" "तुम नहीं समझोगी! खाना, तब बताना!" "पर घर में और लोग भी हैं। अम्मा, बाबूजी, तीन तीन भौजाइयां, भतीजे। सब खा लेते तो क्या हर्ज था!" "अरे पगली, बस चार पीस ही...

इच्छाओं की झोली

  एक राजमहल के द्वार पर बड़ी भीड़ लगी थी। किसी फ़क़ीर ने सम्राट से भिक्षा माँगी थी।* *सम्राट ने उससे कहा- "जो भी चाहते हो, माँग लो"। दिन के प्रथम याचक की किसी भी इच्छा को पूरा करने का उसका नियम था।* *उस फ़क़ीर ने अपने छोटे से भिक्षा-पात्र को आगे बढ़ाया और कहा- "बस, इसे स्वर्ण-मुद्राओं से भर दें"।* *सम्राट ने सोचा, "इससे सरल बात और क्या हो सकती है ?" लेकिन जब उस भिक्षा-पात्र में स्वर्ण मुद्रायें डालीं गईं,तो ज्ञात हुआ कि उसे भरना असम्भव था क्योंकि वह तो जादुई था। जितनी अधिक मुद्रायें उसमें डाली गई,उतना ही अधिक वह ख़ाली होता चला गया।* *सम्राट ने अपने सारे ख़ज़ाने ख़ाली करा दिये,लेकिन ख़ाली पात्र ख़ाली ही रहा।,* *उसके पास जो कुछ भी था सभी उस पात्र में डाल दिया, लेकिन अद्भुत पात्र अभी भी ख़ाली का ख़ाली ही रहा।* *तब उस सम्राट ने कहा,"हे भिक्षु,यह तुम्हारा पात्र साधारण नहीं हैं,उसे भरना मेरी सामर्थ्य के बाहर है।क्या मैं पूछ सकता हूँ,कि इस अद्भुत पात्र का रहस्य क्या है ?* *वह फकीर ज़ौर हँसने लगा और बोला-"इस में कोई विशेष रहस्य नहीं हैं।मर...

दीवानी फलवाली

  मथुरा की एक भाग्यवती मालिन ब्रज में साग-भाजी तथा फूल-फल बेचने के लिये आया करती थी। नन्हे-से सांवरे बालकृष्ण की सलोनी सूरत पर वह अनुरक्त थी। मुरली मनोहर की मनोहर मूर्ति उसके मन-मन्दिर में सदा बसी रहती और वह भावों के पुष्प चढ़ाकर अहर्निश उनकी अर्चना-पूजा किया करती। कृष्ण दर्शन की अभिलाषा श्यामसुन्दर उसके मनोभाव को जानते थे, किंतु उसके अनुराग को बढ़ाने के निमित्त उससे बोलते नहीं थे। वह जब भी आती, तभी आप खेलने के बहाने निकल जाते। वह बेचारी मन मसोसकर रह जाती और मन-ही-मन कहती- "श्यामसुन्दर तुम इतने निष्ठुर क्यों हो, जो तुम्हें चाहते हैं, उनसे तुम दूर भागते हो और और जो तुमसे वैर करते हैं, उन्हें प्रसन्नता से पास बुला लेते हो। तुम्हारी इस वक्रता का असली रहस्य क्या है, इसे कौन जान सकता है।" मालिन के मन से मदनमोहन कभी दूर हटते ही नहीं थे, किंतु शरीर से सदा अलग ही रहते, मानो वे उससे डरते हों। मालिन घंटों नन्दनभवन में बैठी रहती, किंतु नन्दलाल के साथ आज तक उसका कभी संलाप नहीं हुआ। कभी उस बिहारी ने मालिन की ओर हँसकर नहीं देखा। प्रेम की कुछ उल्टी ही रीति है, प्रेमी ज्यों-ही-...

लंका_दहन

जब रावण की लंका दहन की बात होती है तो सबसे पहले हनुमान जी का नाम आता है ! लेकिन इस बात की जानकारी अब तक किसी को नहीं होगी कि रावण की लंका हनुमान जी नें नहीं, बल्कि पांच लोगों ने मिलकर जलाई थी। विद्वानों के अनुसार रामचरित मानस में इस बात का उल्लेख हैं कि लंका केवल हनुमान जी ने नहीं, बल्कि पांच लोगों ने मिलकर जलाई थी।   🔥लंका दहन के बाद जब हनुमान जी वापस श्रीराम के पास पहुंचे तो उन्होंने पूछा मैंने तो आपको सीता की कुशलक्षेम लेने भेजा था। आपने तो लंका ही जला डाली। तब परम बुद्धिमान हनुमान जी ने भगवान राम को उत्तर देते हुए कहा। महाराज लंका मैंने नहीं बल्कि "आपको मिलाकर " पांच लोगों ने जलाई है। आश्चर्य से भगवान राम ने पूछा कैसे और किन पांच लोगों ने लंका जलाई और मैं कैसे शामिल हूं। इन पांच ने जलाई लंका🔥 हनुमान जी ने कहा कि प्रभु लंका जलाई १. आपने, २. रावण के पाप ने, ३. सीता के संताप ने, ४. विभीषण के जाप ने और ५. मेरे पिता वायु देव ने। जब श्री राम ने इस में पूछा कि यह कैसे तो हनुमान जी ने इसका जो उत्तर दिया वह आप भी पढि़ए कैसे- 1- 🔥लंका जलाई आपने : - हनुमान जी ...

मानसरोवर यात्रा

  दिनेश अपने पिताजी को कह रहा था-" पिताजी! मैंने आपकी कैलाश-मानसरोवर यात्रा की पुरी बात करली है। दस दिन बाद अक्षय ट्रावेल्स की टूर जाएगी लेकिन उन्होंने कहा है कि जिनकी उम्र साठ साल से ज्यादा है उन्हें डाक्टर की रिपोर्ट देनी होगी। मैंने चरक अस्पताल में डॉक्टर खुराना को फोन कर दिया है। आप उनसे रिपोर्ट लेकर पासपोर्ट की एक नकल और पच्चीस हजार रुपये अक्षय ट्रावेल्स को दे दीजिएगा।" इतना कहकर दिनेश अपने दप्तर चला गया। शाम को जब दिनेश दप्तर से वापस आया तो देखा कि पिताजी ड्राइंगरुम में बैठे चाय पी रहे थे। दिनेश ने पूछा-" पिताजी! सब काम ठीक से हो गया? अक्षय ट्रावेल्स को पैसे वगैरह सब जमा करा दिए हैं ना?" पिताजी बोले-" बेटा! डाक्टर से रिपोर्ट लेकर मैं सीधे पास के शंकर भगवान के मन्दिर गया और वहाँ शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक कर मन में मान लिया कि मैंने मानसरोवर की यात्रा करली।" दिनेश ने आश्चर्य से पूछा-" ऐसा क्यों पिताजी? क्या मानसरोवर यात्रा पर नहीं जाएंगे?" पिताजी बोले-" बेटा! जब मैं डाक्टर खुराना से चेकअप करवा रहा था तो वहीं मेरे पास...

असली शिक्षा

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  एक बड़ी सी गाड़ी आकर बाजार में रूकी, कार में ही मोबाईल से बातें करते हुयें, महिला ने अपनी बच्ची से कहा, जा उस बुढिया से पूछ सब्जी कैंसे दी, बच्ची कार से उतरतें ही, अरें बुढिया यें सब्जी कैंसे दी? 40 रूपयें किलों, बेबी जी..... सब्जी लेते ही, उस बच्ची ने सौ रूपयें का नोट उस सब्जी वाली को फेंक कर दिया, और आकर कार पर बैठ गयी, कार जाने लगी तभी अचानक किसी ने कार के सीसे पर दस्तक दी, एक छोटी सी बच्ची जो हाथ में 60 रूपयें कार में बैठी उस औरत को देते हुये, बोलती हैं आंटी जी यें आपके सब्जी के बचें 60 रूपयें हैं, आपकी बेटी भूल आयी हैं, कार में बैठी औरत ने कहा तुम रख लों, उस बच्ची बड़ी ही मिठी और सभ्यता से कहा, नही आंटी जी हमारें जितने पैंसे बनते थें हमने ले लियें हमें, हम इसे नही रख सकतें, मैं आपकी आभारी हूं, आप हमारी दुकान पर आए, आशा करती हूं, की सब्जी आपको अच्छी लगें, जिससे आप हमारें ही दुकान पर हमेशा आए, उस लड़की ने हाथ जोड़े और अपनी दुकान लौट गयी....... कार में बैठी महिला उस लड़की से बहुत प्रभावित हुई और कार से उतर कर फिर सब्जी की दुकान पर जाने लगी, जैसें ही वहाँ प...

पड़ोसी धर्म

  नमस्ते राजूभाई....सुबह की सैर करने के बाद घर लौट रहे अपनी गली के एक रहनेवाले राजूभाई को झाड़ू लगाती हुई सुधा ने कहा ... नमस्ते भाभीजी .... वो मुझे आपसे ..... सुधा के बाकी शब्द अभी मुंह में ही रह गए थे कि राजूभाई तेजी से आगे बढ़ गये सुधा मुंह बनाकर मनमोसकर रह गई क्योंकि जो वो पूछना चाह रही थी वो नहीं पूछ पाई थी काफी देर तक वो बहाने से बाहर निकलकर यहां वहां गली के लोगों को देख रही थी ताकि कोई दूध लाता या सैर करने के बाद लौटते हुए उससे मिल जाएं और वो गली में बीते दो तीन दिन पहले रहने आए युवा किराएदारों के बारे में जानकारी ले सके ...कल सुबह भी तो कल शाम को भी उसने एक मोटरसाइकिल पर युवा लड़के लड़की को बैठे हुए देखा था आखिर कौन है ये ... प्रेमी प्रेमिका....या घर से भागकर आएं हुए मां कहीं लिव इन रिलेशनशिप में .... पता नहीं गली का माहौल कैसा बन जाएगा लोग सोचते भी नहीं ऐसे लोगों को मकान किराए पर देने से पहले अरे दूसरे घरों की बड़ी होती बेटियों पर इसका क्या असर पड़ेगा तभी तेजी से एक मोटर साइकिल निकली जिस पर वे दोनों युवा लड़का लड़की ही बैठे थे उनका यूं पास-पास बैठना सुधा को...

कुत्तों ने 25,000 की जलेबियां और खाई

एक बार एक सेठ के घर छापा पड़ा। अफसरः बाकी तो ठीक है सेठजी, लेकिन आपने कुत्तों को जलेबी खिलाने का खर्चा 5 लाख रुपये जो लिखे हैं, उससे हम संतुष्ट नहीं हैं। क्या आप इसका कोई पक्का दस्तावेज या बिल या कोई प्रूफ दिखा सकते हैं? सेठः जी नहीं, इसका तो कोई प्रूफ या दस्तावेज नहीं है मेरे पास। अफसरः सेठजी, ये तो दिक्कत हो गई। हां, एक रास्ता है। यदि आप हमें 25,000 रुपये दे दें तो हम बात को यहीं रफा-दफा कर देंगे। सेठजी मान गए और बोले कि ठीक है साहब, मैं आपको 25,000 दे देता हूं। सेठ ने अपने मुनीम को आवाज लगाई और कहाः मुनीम जी, इन लोगों को 25,000 रुपये दे दो और खाते में लिख देना कुत्तों ने 25,000 की जलेबियां और खाई।

जहाँ नारायण वहां लक्ष्मी का वास

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  एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी से बोले, “लोगों में कितनी भक्ति बढ़ गयी है …. सब “नारायण नारायण” करते हैं !” तो लक्ष्मी जी बोली, “आप को पाने के लिए नहीं!, मुझे पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!” भगवान बोले, “लोग “लक्ष्मी लक्ष्मी” ऐसा जाप थोड़े ही ना करते हैं !” तो माता लक्ष्मी बोली कि , “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए!” भगवान नारायण एक गाँव में ब्राह्मण का रूप लेकर गए… एक घर का दरवाजा खटखटाया… घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा , “कहाँ के है ?” तो भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान का कथा-कीर्तन करना चाहते हैं…” यजमान बोला, “ठीक है महाराज, जब तक कथा होगी आप मेरे घर में रहना…” गाँव के कुछ लोग इकट्ठा हो गये और सब तैयारी कर दी पहले दिन कुछ लोग आये।अब भगवान स्वयं कथा कर रहे थे तो संगत बढ़ी ! दूसरे और तीसरे दिन और भी भीड़ हो गयी,भगवान खुश हो गए कि कितनी भक्ति है लोगों में! लक्ष्मी माता ने सोचा अब देखा जाये कि क्या चल रहा है। लक्ष्मी माता ने बुढ्ढी माता का रूप धर लिया और उस नगर में पहुंची।एक महिला ताला बंद करके कथा में जा रही थी कि माता उसके द्वार पर पहुंची ! बोली, “बेट...

मैंने घर में प्रवेश किया, बाइक की चाबी उछाली , और कहा, "मुझे बहुत भूख लगी है। क्या पका है?

मैंने घर में प्रवेश किया, बाइक की चाबी उछाली , और कहा, "मुझे बहुत भूख लगी है। क्या पका है? सोफे पर बैठ कर अपने जूते उतार रहा था तभी पत्नी की रोमांटिक आवाज आई। I LOVE YOU! मैं चौंक गया अपनी पत्नी को ध्यान से देखा। उसकी काजल भरी आँखों में प्यार था। काले बाल लहरा रहे थे। उसके गुलाबी होठों पर मुस्कान थी।ऑरेंज मैरिज थी मगर 2 साल में पत्नी ने कभी I Love youनहीं कहा था मगर ख्याल आया के चलो बोली है तो में भी इंग्लिश में ही जवाब दे दूँ मैंने पत्नी से भी ज्यादा प्यार से, और भी रोमांटिक अंदाज मेंकहा "I LOVE YOU TOO" अचानक पत्नी के लहजा रोमांस छू हो गया और मुस्कान उसके होठों से निकल गई और आंखें सिकुड़ गईं।उसने कर्कश स्वर में कहा, "मैं कब से कह रही हूं कि अपने कानों का इलाज कराओ कभी उनमें सीटी बजती है। कभी पटाखे बजते हैं। कभी संगीत बजता है।" वैसे Love you Too का शुक्रिया, लेकिन में ने I Love you नहीं कहा था ! आप ने पूछा, क्या पकाया है? मैंने कहा था, आलू...!

एक बार एक प्रार्थना स्थल के सामने एक बुरे आदमी ने जुए और शराब का अड्डा खोल लिया ।

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  प्रार्थना स्थल के गुरुजी के लाख मनाने पर भी वो आदमी वहाँ से हटने को तैयार नही हुआ । अब गुरुजी थक हारकर अंत में कोई उपाय ने देख जब प्रतिदिन सुबह प्रार्थना स्थल आते तो उस आदमी के अड्डे के सामने कुछ देर खड़ा होकर अपनी आँखें मूंद उसकी बर्बादी की प्रार्थना करते । वो आदमी रोज़ गुरुजी को ऐसा करते हुए देखता लेकिन कुछ न बोलता । ऐसा लगातार कुछ दिन तक चलता रहा और फ़िर अचानक एक दिन शॉर्ट सर्किट की वजह से उस जुए और शराब के अड्डे में जबरदस्त आग लग गयी और वो पूरी तरह से तबाह हो गया । इस घटना के बाद उस बुरे आदमी को बहुत गुस्सा आया और उसने गुरुजी को कोर्ट में घसीटा , साथ ही जज से फ़रियाद की कि इस गुरुजी की प्रार्थना की वज़ह से मेरा पूरा व्यापार बर्बाद हो गया । अब मेरे नुकसान की भरपाई इस गुरुजी से करवाई जाए। ख़ुद को फँसते देख गुरुजी ने अपनी सफ़ाई दी.... हुज़ूर , प्रार्थना से कुछ नहीं होता बल्कि इसका अड्डा तो शॉर्ट सर्किट के कारण जला है...! जब दोनों अपनी अपनी तर्क पर बहुत देर तक अड़े रहे तो जज साहब बड़े हैरान हुए । अंत में जज साहब ख़ूब ज़ोर से हँसे । जज के इस विचित्र व्यवहार को देखकर वहां म...

भिखारी और दुकान के मालिक

  एक रेस्टोरेंट में कई बार देखा गया कि, एक व्यक्ति (भिखारी) आता है और भीड़ का लाभ उठाकर नाश्ता कर चुपके से बिना पैसे, दिए निकल जाता है। एक दिन जब वह खा रहा था तो एक आदमी ने चुपके से दुकान के मालिक को बताया कि यह भाई भीड़ का लाभ उठाएगा और बिना बिल चुकाए निकल जाएगा।  उसकी बात सुनकर रेस्टोरेंट का मालिक मुस्कराते हुए बोला – उसे बिना कुछ कहे जाने दो, हम इसके बारे में बाद में बात करेंगे। हमेशा की तरह भाई ने नाश्ता करके इधर-उधर देखा और भीड़ का लाभ उठाकर चुपचाप चला गया। उसके जाने के बाद, उसने रेस्टोरेंट के मालिक से पूछा कि मुझे बताओ कि आपने उस व्यक्ति को क्यों जाने दिया। रेस्टोरेंट के मालिक ने कहा आप अकेले नहीं हो, कई भाइयों ने उसे देखा है और मुझे उसके बारे में बताया है। वह रेस्टोरेंट के सामने बैठता है और जब देखता है कि भीड़ है, तो वह चुपके से खाना खा लेता है। मैंने हमेशा इसे नज़रअंदाज़ किया और कभी उसे रोका नहीं, उसे कभी पकड़ा नहीं और ना ही कभी उसका अपमान करने की कोशिश की.. क्योंकि मुझे लगता है कि मेरी दुकान में भीड़ इस भाई की प्रार्थना की वजह से है वह मेरे रेस्टोरें...

I don't care" की जिंदगी मत जिओ....

  घर में एक आदमी और उसकी पत्नी का झगड़ा हुआ। 20 मिनट बाद आदमी बाथरूम में नहाने गया... जब वह स्नान कर रहा था, तो वह बाथरूम के अंदर गिर गया... उसने अपनी पत्नी को आवाज दी, लेकिन उसकी पत्नी ने कोई जवाब नहीं दिया... उसकी पत्नी ने रुखाई से कहा: "मेरा नाम मत पुकारो, बस मुझे अकेला छोड़ दो" ... महिला को पता नहीं था कि उसका पति उसे क्यों बुला रहा है, लेकिन वह उसका जवाब देने में विफल रही क्योंकि वह अभी भी अपने पति पर क्रोधित थी। एक घंटे के बाद उसने देखा कि उसका पति बाथरूम से बाहर नहीं आया है। उसने उसका नाम पुकारा कोई जवाब नहीं... अब तो सब कुछ छोड़कर वह बाथरूम की ओर दौड़ी। बाथरूम में घुसी तो पति को फर्श पर गिरा देखा... उसने उसका नाम पुकारा और उसे हिलाया, आदमी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वह चिल्लाई और अपने पड़ोसियों को बुलाने के लिए बाहर भागी... उसका पति पहले ही मर चुका था, क्योंकि उसका शरीर ठंडा था... चाहे आप कितने भी क्रोधित या दुखी क्यों न हों, मदद के लिए पुकारने वालों की बात कभी न टालें, अगर औरत ने अपने पति के बुलाने पर ध्यान दिया होता, तो उसकी हालत देखकर समय पर उसे अस्पत...