एक बार एक प्रार्थना स्थल के सामने एक बुरे आदमी ने जुए और शराब का अड्डा खोल लिया ।

 

प्रार्थना स्थल के गुरुजी के लाख मनाने पर भी वो आदमी वहाँ से हटने को तैयार नही हुआ ।

अब गुरुजी थक हारकर अंत में कोई उपाय ने देख जब प्रतिदिन सुबह प्रार्थना स्थल आते तो उस आदमी के अड्डे के सामने कुछ देर खड़ा होकर अपनी आँखें मूंद उसकी बर्बादी की प्रार्थना करते ।

वो आदमी रोज़ गुरुजी को ऐसा करते हुए देखता लेकिन कुछ न बोलता ।

ऐसा लगातार कुछ दिन तक चलता रहा और फ़िर अचानक एक दिन शॉर्ट सर्किट की वजह से उस जुए और शराब के अड्डे में जबरदस्त आग लग गयी और वो पूरी तरह से तबाह हो गया ।

इस घटना के बाद उस बुरे आदमी को बहुत गुस्सा आया और उसने गुरुजी को कोर्ट में घसीटा , साथ ही जज से फ़रियाद की कि इस गुरुजी की प्रार्थना की वज़ह से मेरा पूरा व्यापार बर्बाद हो गया । अब मेरे नुकसान की भरपाई इस गुरुजी से करवाई जाए।

ख़ुद को फँसते देख गुरुजी ने अपनी सफ़ाई दी.... हुज़ूर , प्रार्थना से कुछ नहीं होता बल्कि इसका अड्डा तो शॉर्ट सर्किट के कारण जला है...!

जब दोनों अपनी अपनी तर्क पर बहुत देर तक अड़े रहे तो जज साहब बड़े हैरान हुए ।

अंत में जज साहब ख़ूब ज़ोर से हँसे ।

जज के इस विचित्र व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोग हैरत में पड़ गए ।

उसके बाद जज साहब ने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करते हुए एक लंबी सांस ली औऱ फ़िर कहा....." शायद ये दुनिया का पहला ऐसा मामला है , जिसमें एक दुष्ट आदमी कह रहा है कि सब कुछ प्रार्थना की वजह से हुआ है जबकि एक प्रार्थना करने वाला बोल रहा है कि प्रार्थना से कुछ नहीं होता ".....!!

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समय औऱ परिस्थितियों के हिसाब से अक़्सर लोगों के विचार औऱ उनकी भावनाएं बदलती रहती हैं ।

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